Showing posts with label yuva. Show all posts
Showing posts with label yuva. Show all posts

Saturday, August 14, 2010

मेरा लहू देश के काम, माँ तुझे प्रणाम - 15 अगस्त 2010

मेरा लहू देश के काम, माँ तुझे प्रणाम - 15 अगस्त 2010
भारत में प्रति वर्ष हजारों लोग रक्त की अनुपलब्धता से मर जाते हैं. दुर्घटना में घायल व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं, रक्त के कैंसर से पीड़ित मरीजों तथा शल्य चिकित्सा से गुजरने वाले मरीजों को रक्त की जरुरत पड़ती है. किन्तु कई बार ब्लड बैंकों में रक्त की कमी तथा स्वैच्छिक रक्त-दाताओं की कमी से ऐसे मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पाता है जिससे लोगों की जान चली जाती है.
रक्त की इस कमी को दूर करने हेतु अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच ने रक्त-दान को राष्ट्रीय कार्यक्रम घोषित किया है, इसी कड़ी में बिहार प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच द्वारा आगामी स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त २०१० को पूरे प्रदेश में अपनी समस्त शाखाओं के माध्यम से, भारत माता को समर्पित रक्त-दान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है.
इस रक्त-दान अभियान का नाम "मेरा लहू देश के काम" दिया गया है. अपने देश और देशवासियों से अपने प्रेम को प्रदर्शित करने के इस अदभुत अभियान द्वारा मंच, भारत माता को अपनी सच्ची सलामी पेश करेगा. यह अभियान भारत माता की रक्षा में शहीद होने वाले सैनिकों तथा पुलिस के जवानों को समर्पित किया गया है.
बिहार प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच सभी शाखाओं, युवाओं तथा अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं से इस अभियान में पूर्ण सहयोग की अपील करता है.
इस अभियान का उदघाटन श्री नन्द किशोर यादव, माननीय स्वास्थ्य मंत्री, बिहार द्वारा किया जायेगा.

आप भी इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें -
मेरा लहू देश के काम... माँ तुझे प्रणाम



पटना में रक्तदान शिविर का आयोजन 15 अगस्त 2010 को महाराणा प्रताप भवन, आर्य कुमार रोड (दिनकर चौक के पास), पटना एवं अग्रसेन भवन, चौक (पंजाब नेशनल बैंक के पीछे), पटना सिटी में किया गया है. मारवाड़ी युवा मंच सभी युवाओं से इस अभियान में सहयोग करने की अपील करता है.
===============
संपर्क सूत्र : Anil Kumar Verma, State President, Bihar Prantiya Marwari Yuva Manch, Mob. 9430920713, 9835285596

Thursday, December 11, 2008

Flood relief and rehabilitation project by Marwari Yuva Manch

A long-term relief and rehabilitation project - "Ummide" will be launched very soon by the Bihar Prantiya Marwari Yuva Manch (BPMYM) for the flood affected people in Bihar.

Earlier, delegation of BPMYM headed by Smt. Sarita Bajaj & Sri Jagdish Chandra Mishra distributed relief materials including infant food, milk powder, food grains, biscuits, torches, clothes, medicines, utensils and tarpaulin sheets to the flood-affected people in various districts. Total Relief material worth Rs. 1.5 Crore were
distributed among the people.

Permanent Mega Relief camps were setup by Marwari Yuva Manch volunteers at Triveniganj and Supaul blocks of Supaul district, Forbesganj block of Araria district and in Madhepura Town.We were following a relay model. We were looking at three dimensions: reaching out to the needy at rescue points, exclusively engaging with the most vulnerable families on a long term basis, and damage assessment.

The floods in Bihar have displaced 3.2 million people and killed hundreds of people. The words "FLOODS IN BIHAR" convey the impression that this is something which happens every year. But unfortunately, the floods occurring this year caused by River Kosi which changed its course due to an embankment breach at Indo-Nepal border, brought a havoc of unthinkable magnitude submerging thousands of villages in
water which had never experienced floods in last hundred years. Millions of people were left homeless along with a huge loss of lives and property in parts of Bihar that were already marginalized.

Marwari Yuva Manch is carrying out second phase of relief work (or you can say 1st phase of rehabilitation program) in the affected districts by supplying rehabilitation kits (all necessary items included in a kit) after the surveys conducted by its volunteers to ensure that relief is getting to those who need it the most. Like with any other relief work after a natural disaster, funds become
a major constraint. If we have sufficient funds available, then the required relief supplies including food and medicines can be procured locally and more people can be hired to help us in carrying the relief work at the ground. Now we are focusing on Permanent rehabilitation project and hope people will come forward to help us for
this noble cause.

- Anil Verma

Wednesday, November 19, 2008

मारवाड़ी युवा मंच का बाढ़ राहत अभियान - एक संस्मरण

हम बारह जने थे, चार-चार लोग तीन बोट पर सवार हुए साथ ही चार आर्मी के जवान भी बैठे हर एक बोट पर. रिलीफ मेटेरियल हमने लोड कर लिया था. साथ में ढेर सारी पानी की बोतलें और हाँ हर एक के लिए एक छाता भी. धुप तो चमड़ी जला रही थी इन दिनों. वाह री कुदरत तेरा भी गजब खेल है नीचे तो चारो तरफ़ पानी ही पानी और ऊपर से आग बरस रही है. मोटर बोट स्टार्ट हुई और ....

बाढ़ राहत अभियान से पुनर्वास कार्यक्रम तक - ३ महीनो का सफर

अनिल वर्मा, १८ नवम्बर २००८, पटना सिटी.
प्रलय.. विनाश.. तबाही.. लोगो की चीख पुकार.. डूबते लोग.. तैरती लाशें.. और अंत में गहरा सन्नाटा.. जिसे रह-रह कर सुख चुके आंसुओ के साथ अभागों का क्रंदन ही तोड़ता था. एक युग की तरह समाप्त हुए इस दौर में एक-एक पल बरसो की तरह प्रतीत होते थे.

आज उस त्रासदी को घटित हुए ३ महीने पूरे हुए जिसकी गूँज विधवाओ के विलाप और बच्चो की सिस्कारियों के रूप में आज भी प्रतिध्वनित होती है.
काफ़ी कुछ देखा जाना और महसूस किया पिछले ३ महीनो में. लोगो को... जो बेबस और लाचार थे, और उनको भी जो इनकी बेबसी को अपनी खुशनसीबी मान रहे थे. कुछ ऐसे थे जो इनकी सेवा करते हुए न्योछावर हो रहे थे .. धन्य मान रहे थे की कुछ काम तो आ सके .. उसके बाद भी अफ़सोस की ओह कुछ भी तो न कर सके .. काश और कर पाते.
और हाँ ऐसे लोगो को भी देखा जिन्हें ये अफ़सोस था की अरे इस सारी कवायद से हमें कितना फायदा हुआ.. इन्हे अफ़सोस था की उन अभागों के आंसू पोंछने में उनका नाम क्यो नही हुआ.. ये और चाहे कुछ ना करते, एक रुमाल तो दे ही सकते थे और ढोल पीट सकते थे.. मीडिया और समाज में की देखो ये जो आंसुओ से भींगा हुआ रुमाल है ये हमने अर्रेंज करवाया था.. इसको निचोडो.. अरे देखो-देखो कितने आंसू है. इनको पोंछने का क्रेडिट हमें जाता है.. हर आंसू का हिसाब वसूलना है. आओ एक फोटो हो जाए इस रुमाल के साथ.. क्लिक . लो जी हो गयी समाज सेवा.
आप पूछेंगे.. बहुत नाराज हो भाई.. हाँ हूँ.. भड़ास निकाली है. इस ब्लॉग में ये सब क्यो लिखा? क्योकि यहाँ लिखना जरुरी था. किंतु क्षमा करें इसका उत्तर या इस बारे में किसी भी प्रश्न का कोई जवाब मुझसे कभी नही मिलेगा. मन हल्का हुआ आइये अब कुछ और भी बातें करें.
बाढ़ राहत अभियान को हम उन बातों के लिए नही याद रखेंगे जो ऊपर लिखी है क्योकि इस बारे में ज्यादा लोग नही जानते. ये लडाई तो मानसिक रूप से लड़ी जा रही थी.
धरातल पर तो शौर्य की गाथाएं लिखी गयीं. यहाँ पराक्रम दिखाने को हल्दीघाटी का मैदान तो नही था लेकिन कोसी के कोप में डूबा एक बड़ा भू-भाग था जिसने तबाही के मंजर पर हौंसलों की इबारतों को खडा होते देखा. नमन है साथियों आप भीष्म है और आप ही कृष्ण भी.
आज के दौर में जब लोग अस्पताल के सामने बेहोश पड़े आदमी को भी अन्दर नही ले जाना चाहते क्योकि उन्हें ऑफिस में देर हो जायेगी.. या यह उनकी जवाबदेही नही है.
ऐसे में, आप सबो ने सेवा की ऐसी मिसाल पेश की है जिसके बारे में लोग बरसों तक चर्चे करेंगे. .. कम से कम वो तो करेंगे ही.. जिन बेबसों के लिए आपने अपने व्यापार, व्यवसाय और परिवार का त्याग किया. नेताओ, मीडिया और ...... का सर्टिफिकेट चाहिए किसे?
बेमिसाल ... शाबास .. शाबास.
अब आगे क्या?
हूँ.. .... करने को तो काफ़ी कुछ है. पुनर्वास प्रोजेक्ट हम सबों ने फाईनल किया था ... करेंगे भी .. प्रांत के पास अर्थाभाव है. लेकिन ये तो पहले भी था तब भी तो काम हुआ ही. हमें भरोसा है हमारी लीडर पर.. जब यहाँ तक पहुंचे है तो इस मंजिल को भी पा लेंगे. हमारी लीडर के बारे में बड़ी बात ये है की उनका ह्रदय माँ की तरह कोमल हो लेकिन उनके इरादे फौलाद की तरह मजबूत होते है. .. और जरुर करेंगे भाई.. समाज के लिए करना है.. समाज जरुर सहयोग करेगा.
जगदीश जी, जिन्हें हम प्यार से पप्पू भइया कहते है उनकी चाचीजी का स्वर्गवास हो गया. इस वजह से यह प्रोजेक्ट दस-बारह दिनों के लिए विलंबित हो गया है अन्यथा छठ पर्व के बाद हम जोर-शोर से इस प्रोजेक्ट में लगने ही वाले थे. पप्पू भइया एक-दो दिनों में फ्री हो जायेंगे और पुनः पूरी टीम निकल पड़ेगी उसी सफर पर जिसकी शुरुआत तो हमें पता होती है, किंतु अंत नही. गजब अहसास है... सोचकर ही .. शरीर ऊर्जा से भर उठता है.
रह-रह कर फंड की चिंता होती है किंतु भरोसा है .. पप्पू भइया है न .. सरिता भाभी - आनंद भइया है ना .. वो लोग देख लेंगे. पहले भी इन लोगो ने सब कुछ संभाला था. आगे भी इन पर ही सारी जिम्मेदारी है.
और अंत में धन्यवाद ... आज के कर्ण और भामाशाहों का जिन्होंने मानवता की सेवा में अपना खजाना खोल दिया अन्यथा ये सब कुछ हम सबों के बस का था क्या?

- अनिल वर्मा
मारवाडी युवा मंच, बिहार का एक कार्यकर्ता